भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच चल रही खींचतान के बीच, सांसद शशि थरूर ने शनिवार को पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा कि 1937 से ही पार्टी राष्ट्रगान का एक स्टैंज़ा और वंदे मातरम के दो पद गाती आ रही है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि स्थिति बिल्कुल साफ है।

तिरुवनंतपुरम : कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद में कांग्रेसस पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 1937 से ही राष्ट्रगान का एक पद और वंदे मातरम के दो पद गाती आ रही है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुझे लगता है कि स्थिति बिल्कुल साफ है कि कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों में कांग्रेस मौजूदा परंपरा का पालन कर रही है। मुझे लगता है कि अगर कोई राष्ट्रीय या सरकारी कार्यक्रम होता है, तो हम सभी पूरे कार्यक्रम के लिए खड़े होंगे। यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या बजाया जा रहा है। लेकिन हमारी पार्टी में हमारा रुख यह है कि 1937 से हम राष्ट्रगान का केवल एक पद और वंदे मातरम के दो पद गाते आ रहे हैं। और यही हमारा मौजूदा रुख बना रहेगा।

इससे पहले दिन में, भारतीय जनता पार्टी ने वंदे मातरम के सम्मान और ऐतिहासिक विरासत पर एक बड़ा प्रस्ताव पारित किया। बीजेपी ने कहा कि वह राष्ट्रीय गीत के इतिहास और महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाएगी।

बीजेपी ने कांग्रेस के फैसले की निंदा की

पार्टी ने 19 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति द्वारा लिए गए उस फैसले की कड़ी निंदा की। इसमें 1937 के प्रस्ताव को फिर से अपनाया गया था। इस प्रस्ताव के तहत कांग्रेस कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो पद ही गाए जा सकते हैं। बीजेपी ने कहा कि वह वंदे मातरम को भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है।

कांग्रेस के फैसले का विरोध करेगी बीजेपी

बीजेपी के प्रस्ताव में कहा गया है कि पार्टी वंदे मातरम को दो पदों तक सीमित करने के कांग्रेस के फैसले का कड़ा विरोध करेगी। इसका उद्देश्य वंदे मातरम के पूरे छह पदों के सम्मान, गरिमा और विरासत की रक्षा करना है। साथ ही, यह 1950 की संविधान सभा की घोषणा और संसद द्वारा पारित उस कानून की पुष्टि करता है जो राष्ट्रीय गीत को ‘जन गण मन’ के बराबर कानूनी संरक्षण देता है।

यह राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक दबाव, तुष्टीकरण या वोट-बैंक की राजनीति के अधीन करने की किसी भी कोशिश का भी विरोध करेगी। प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी का प्रस्ताव संविधान और संसद के कानून से ऊपर नहीं हो सकता, और 1937 का राजनीतिक समझौता 1950 के संवैधानिक फैसले और उसके बाद बने कानूनों से ज्यादा अहम नहीं हो सकता।

प्रस्ताव में क्या

इसके अलावा, प्रस्ताव में कहा गया कि पार्टी ‘वंदे मातरम’ पर रोक लगाने के पीछे के ऐतिहासिक संदर्भ को जनता के सामने लाएगी, जिसमें मुस्लिम लीग की आपत्तियां और सांप्रदायिक व अलगाववादी मांगों की राजनीति शामिल है। पार्टी महात्मा गांधी के उस बयान को भी लोगों तक पहुंचाएगी जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को ‘सबसे शुद्ध राष्ट्रीय भावना’ से जुड़ा ‘साम्राज्यवाद-विरोधी नारा’ बताया था।

बीजेपी कार्यकर्ता ‘वंदे मातरम’ के इतिहास, अर्थ और राष्ट्रीय महत्व को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाएंगे। युवाओं के बीच एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि पूरा राष्ट्रगीत भुला न दिया जाए और आने वाली पीढ़ियां भारत की आज़ादी, संघर्ष और बलिदान के साथ इसके गहरे जुड़ाव को समझ सकें। प्रस्ताव में कहा गया है कि राजनीतिक फ़ायदे के लिए ‘वंदे मातरम’ के सम्मान से कोई समझौता मंज़ूर नहीं किया जाएगा।

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