महाराष्ट्र में कैब-ऑटो चालकों के लिए मराठी जरूरीमहाराष्ट्र में कैब-ऑटो चालकों के लिए मराठी जरूरी, जानिए नए नियम का क्या होगा असर


महाराष्ट्र सरकार ने कमर्शियल यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान को अनिवार्य कर दिया है। नए नियमों के तहत टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और अन्य यात्री परिवहन सेवाओं से जुड़े चालकों को यात्रियों के साथ बुनियादी बातचीत के लिए मराठी समझना और बोलना आना जरूरी होगा। नियमों का लागू होना 16 अगस्त 2026 से तय किया गया है।


सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बेहतर संवाद सुनिश्चित करना है। खासकर आपातकालीन परिस्थितियों में स्थानीय भाषा में बातचीत को उपयोगी बताया गया है।


महाराष्ट्र में क्या बदला है?


महाराष्ट्र के परिवहन विभाग ने Motor Vehicles Rules, 1989 में बदलाव किए हैं। इन संशोधनों में कमर्शियल यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी के कार्यात्मक या व्यावहारिक ज्ञान की शर्त शामिल की गई है।


यह नियम केवल पारंपरिक टैक्सी और ऑटो तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार ऐप-आधारित कैब और अन्य कमर्शियल यात्री परिवहन सेवाओं से जुड़े ड्राइवर भी इसके दायरे में आते हैं।


16 अगस्त से लागू होगा नियम


महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने जुलाई में घोषणा की थी कि कमर्शियल वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा संबंधी नियम 16 अगस्त 2026 से लागू किया जाएगा। परिवहन विभाग ने इसके लिए संबंधित मोटर वाहन नियमों में संशोधन किया है।


गौरतलब है कि सरकार ने पहले इस नियम को 1 मई से लागू करने की योजना बनाई थी, लेकिन टैक्सी और ऑटो यूनियनों की मांग के बाद ड्राइवरों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय दिया गया।


ड्राइवरों को क्या करना होगा?


गैर-मराठी भाषी ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का एक कम्युनिकेशन कोर्स और प्रमाणपत्र व्यवस्था शुरू की गई है। परिवहन विभाग के अनुसार, संबंधित ड्राइवरों को निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करके प्रमाणपत्र हासिल करना होगा।


इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कठिन साहित्यिक मराठी सिखाना नहीं, बल्कि यात्रियों के साथ रोजमर्रा की बातचीत के लिए जरूरी भाषा कौशल विकसित करना है। रिपोर्टों के अनुसार, एक लाख से अधिक ऑटो और टैक्सी चालकों ने कार्यात्मक मराठी प्रशिक्षण पूरा किया है।


नियम नहीं मानने पर क्या होगा?


नए नियमों के तहत मराठी भाषा संबंधी शर्तों का पालन नहीं करने वाले चालकों पर कार्रवाई की जा सकती है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, नियमों के उल्लंघन पर ड्राइविंग ऑथराइजेशन या बैज को निलंबित किया जा सकता है, जबकि बार-बार उल्लंघन होने पर लाइसेंस या बैज रद्द करने जैसी कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है।


हालांकि, कार्रवाई की वास्तविक प्रक्रिया और अलग-अलग मामलों में लागू होने वाले दंड को परिवहन विभाग के नियमों और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के आधार पर देखा जाएगा।


सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?


सरकार का मुख्य तर्क यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना है। परिवहन मंत्री ने कहा है कि स्थानीय भाषा में बातचीत से भ्रम कम करने और आपातकालीन स्थिति में मदद लेने में आसानी हो सकती है।


सरकार ने ड्राइवरों को भाषा सीखने में मदद देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। इसका उद्देश्य नियम लागू करने के साथ-साथ गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों को आवश्यक भाषा कौशल उपलब्ध कराना है।


नियम को लेकर क्या विवाद है?


इस नीति को लेकर पहले से बहस भी होती रही है। कुछ ड्राइवर और यूनियन यह चिंता जता चुके हैं कि भाषा की शर्त से गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से सरकार को नियम लागू करने की समयसीमा बढ़ानी पड़ी थी।


इसके अलावा, महाराष्ट्र में मराठी भाषा की अनिवार्यता से जुड़ी कानूनी बहस भी सामने आई है। Indian Express ने अप्रैल में रिपोर्ट किया था कि बॉम्बे हाई कोर्ट के पुराने फैसले के कारण ऐसे नियमों को लेकर कानूनी सवाल उठ सकते हैं।


यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?


नियम लागू होने के बाद यात्रियों को उम्मीद की जा रही है कि कमर्शियल यात्री वाहन चालकों से मराठी में बुनियादी संवाद करना आसान होगा। किराया, गंतव्य, रास्ता और आपातकाल जैसी स्थितियों में स्थानीय भाषा में बातचीत को सरकार नियम का प्रमुख उद्देश्य मानती है।


हालांकि, नियम का वास्तविक प्रभाव उसके क्रियान्वयन और जांच व्यवस्था पर निर्भर करेगा।


महाराष्ट्र में कमर्शियल यात्री वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने का फैसला 16 अगस्त 2026 से महत्वपूर्ण रूप से लागू होने जा रहा है। सरकार इसे बेहतर यात्री-ड्राइवर संवाद और सार्वजनिक सेवा से जोड़ रही है, जबकि ड्राइवर संगठनों की ओर से आजीविका और अनुपालन को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।


आने वाले दिनों में परिवहन विभाग द्वारा नियमों के वास्तविक क्रियान्वयन और गैर-अनुपालन पर कार्रवाई की स्थिति इस नीति के प्रभाव को स्पष्ट करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *